05 जनवरी 2012

अंतर

क्यों बुनती रहती हो तुम
शब्दों के मकड़ जाल
उलझा कर कागज़ के टुकड़ों पर
फिर कहती हो 
हल करो पहेलियाँ 
देखो कितने रंग भर के बनाई है
कितने गूढ़ रहस्य छिपे हैं
इन तस्वीरों में 

ज़िन्दगी पहले ही 
कम उलझी हुई नहीं है क्या
खुलते ही नहीं ज़िन्दगी 
के रहस्य
पार कर लूं एक दरवाज़ा
तो फिर से सामने आ जाता
दूसरा बंद कमरा 

और तुम्हारा यह कहना
भी लगता है गैर वाजिब 
तुम तो निरे बुद्धू हो
नहीं समझ पाते तुम
शब्दों की जटिलता
नहीं करना आता तुम को 
भावों का सम्प्रेषण 
नहीं कहनी आती तुम्हे 
कविता 

दिल करता है मेरा 
तेरी आँखों पर अटके हुए
चश्में को उतार
हौले से तेरे 
नाजुक गालों को पकड़
तेरे माथे की तलहटी पर
अपने गरम होंठ रख दूं
और पी जाऊं तेरी
जुल्फों की महक 
और पूछूं तुमसे
क्या नहीं हुआ
भावों का सम्प्रेषण
क्या नहीं कही
कविता मैंने  


30 टिप्‍पणियां:

  1. शुक्रवार भी आइये, रविकर चर्चाकार |

    सुन्दर प्रस्तुति पाइए, बार-बार आभार ||

    charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  2. और पूछूं तुमसे
    क्या नहीं हुआ
    भावों का सम्प्रेषण
    क्या नहीं कही
    कविता मैंने ...

    भावों का मूक सम्प्रेषण.... बहुत असरदार ..

    उत्तर देंहटाएं
  3. इससे बेहतर भी नज़्म क्या होगी!! कमाल है विशाल जी!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह वाह...बेहद खूबसूरती से आपने कविता कही...
    बहुत अच्छे...

    उत्तर देंहटाएं
  5. क्या नहीं हुआ
    भावों का सम्प्रेषण
    क्या नहीं कही
    कविता मैंने

    और आपको उम्मीद है कि कोई जवाब मिलेगा ? सारी कविता उतर जायेगी मन में :):)

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत ही खुबसूरत अहसास हैं | काफी दिनों बाद........नया साल मुबारक हो |

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुती .......

    उत्तर देंहटाएं
  8. दिल करता है मेरा
    तेरी आँखों पर अटके हुए
    चश्में को उतार
    हौले से तेरे
    नाजुक गालों को पकड़
    तेरे माथे की तलहटी पर
    अपने गरम होंठ रख दूं
    और पी जाऊं तेरी
    जुल्फों की महक
    और पूछूं तुमसे
    क्या नहीं हुआ
    भावों का सम्प्रेषण
    क्या नहीं कही
    कविता मैंने ......

    wow......
    very romantic...

    उत्तर देंहटाएं
  9. बेहतरीन ...नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  10. Kavita jab jeene lage to shabdon ki jaroorat nahi hoti .... Lajawab rachna ...
    Aapko naya Saal Mubarak ...

    उत्तर देंहटाएं
  11. बेहतरीन प्रस्तुति -क्या नहीं कही कविता मैंने ....

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाह ....शानदार प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  13. अगर शब्दों को समझ पाते तो भावों की जटिलता कॊ भी समझ ही लेते:)

    उत्तर देंहटाएं
  14. प्रेम शब्दों का मुहताज़ कहां,बस प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो,सुंदर रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  15. waah! bahut hi umda likh aap ne,laajwaab.....pahli baar aap ke blog par aana hua,bahut badiya likhte hai aap,bdhaai sweekaren....

    उत्तर देंहटाएं
  16. bilkulji aapke bhaavon ka sampreshan pathakgan ko ho gya hai Vishalji. bahut achha likha hai.

    shubhkamnayen

    उत्तर देंहटाएं
  17. और तुम्हारा यह कहना
    भी लगता है गैर वाजिब
    तुम तो निरे बुद्धू हो
    नहीं समझ पाते तुम
    शब्दों की जटिलता
    नहीं करना आता तुम को
    भावों का सम्प्रेषण
    नहीं कहनी आती तुम्हे
    कविता
    ....pyar jab kavita ban jaati hain to phir jatila sahaj ban padti hain..
    sundar rachna... shubhkamnayen.

    उत्तर देंहटाएं
  18. वाह बहुत खूब. भावो कि जटिलता को आपने शब्दों में पिरो दिया है.

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहूत सुंदर भावो का संगम है....
    बहूत हि बेहतरीन रचना है...
    तारीफ में शब्द नही...

    उत्तर देंहटाएं
  20. Amrita Tanmay

    बार-बार पढ़ना अच्छा लगता है ये नज़्म..

    उत्तर देंहटाएं
  21. चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’

    बहुत ख़ूब!!

    उत्तर देंहटाएं
  22. "sirf ehsaas hai yeh rooh se mehsoos karo......."

    behtareen prastuti !

    उत्तर देंहटाएं
  23. बहुत ही खुबसूरत अहसास| सुंदर रचना|

    उत्तर देंहटाएं
  24. और पी जाऊं तेरी
    जुल्फों की महक
    और पूछूं तुमसे
    क्या नहीं हुआ
    भावों का सम्प्रेषण
    क्या नहीं कही
    कविता मैंने

    सम्पूर्णता के साथ भाव सम्प्रेषण।
    बहुत अच्छी कविता।

    उत्तर देंहटाएं

मंजिल न दे ,चिराग न दे , हौसला तो दे.
तिनके का ही सही, मगर आसरा तो दे.
मैंने ये कब कहा कि मेरे हक में हो जबाब
लेकिन खामोश क्यों है कोई फैसला तो दे.