27 जनवरी 2012

भाव और शब्द

भाव के गर्भ से 
जन्म लेते शब्द
ज़ेर से अटे
नग्न
करते हैं रुदन
पर होते हैं जीवंत

शब्दों से
भाव का निर्माण
मूर्तिकार की रचना
तराशी हुई
सुन्दर
मनमोहक
पर निष्प्राण  

29 टिप्‍पणियां:

  1. अद्भुत भाव संयोजन शब्द और मूर्तिकार के लिए ......शब्द और मूर्ति बेशक निष्प्राण होते हैं लेकिन प्राण वालों में वह एक नयी चेतना का संचार करते हैं .....!

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. सच कहा केवल भाई,लेकिन मेरा अभिप्राय सिर्फ रचना लिखने की दो विधायों से था , भाव से लिखे गए शब्द ,शब्दों से निर्मित भाव से ज्यादा असरदायक होते हैं.

      हटाएं
  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. कई बार
      शब्द भी होते हैं निष्प्राण से
      कितना भी करें रुदन
      नहीं रेंगती जूँ
      किसी के कानों पर
      रोते रहते हैं बहुत से लोग
      और मुस्कराते रहते हैं थोड़े से लोग
      देख कर ...सुनकर उनका रुदन ....

      मूर्ति निष्प्राण भले हो
      पर नहीं देती
      किसी को त्रास
      जीवित मनुष्यों की तरह.
      मैं तो जब भी बातें करता हूँ
      अगढ़ पत्थरों से
      निकल कर बाहर आ जाती है
      एक कविता.

      हटाएं
    2. बहुत सुन्दर लिखा है आपने,कौशलेन्द्र भाई.
      पधारने का शुक्रिया.
      आपको लिखने के लिए प्रेरित करते मेरे शब्द सफल हुए.शुक्रिया.

      हटाएं
  3. खूबसूरत प्रस्तुति |
    मेरी बधाई स्वीकारें ||

    उत्तर देंहटाएं
  4. भाव से शब्द और शब्द से भाव का निर्माण ..अच्छी प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर.....भाव से शब्द.........फिर शब्द से भाव |

    उत्तर देंहटाएं
  6. अद्भुत...शब्दों से निर्मित भाव निष्प्राण रचना में भी प्राण फूंक देते हैं...

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. सही कहा आपने संध्या जी.धन्यवाद.

      हटाएं
  7. बेहतरीन अभिव्यक्ति ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. सच है की भाव होते हाँ फिर शब्द बनते हैं और फिर अंत में शब्द ही भाव उत्पन करते हैं ...
    लाजवाब अभिव्यक्ति है ...

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुन्दर रचना। धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  10. भाव को मोल भी कहते हैं, भाव हैं तो ही शब्दों का मोल है।

    उत्तर देंहटाएं
  11. शब्दों से
    भाव का निर्माण
    मूर्तिकार की रचना
    तराशी हुई
    सुन्दर
    मनमोहक
    पर निष्प्राण

    fir bhi kahin sabke bheetar tak apna prabhav chhod jaate hain....

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत ही बेहतरीन अभिव्यक्ति ..

    उत्तर देंहटाएं
  13. शब्दों से
    भाव का निर्माण
    मूर्तिकार की रचना
    तराशी हुई
    सुन्दर
    मनमोहक
    पर निष्प्राण.

    बहुत सुंदर प्रस्तुति. बेहतरीन अभिव्यक्ति. अभिनन्दन.

    उत्तर देंहटाएं

मंजिल न दे ,चिराग न दे , हौसला तो दे.
तिनके का ही सही, मगर आसरा तो दे.
मैंने ये कब कहा कि मेरे हक में हो जबाब
लेकिन खामोश क्यों है कोई फैसला तो दे.