07 अक्तूबर 2011

मैं तो बस रेत हूँ

मेरे अल्फ़ाज़ की 
इमारत में
मेरा चेहरा तलाशने वाले
तुझको 
इसकी नींव तक 
जाना होगा
बड़ी ज़रखेज मिट्टी थी
कभी वहां 
फसले गुल लहलहाती थी 
आज बस रेत है
दबे हुए हैं  जिसमें
गुलों के पिंजर कितने
इसी रेत में
उठा करते हैं
बवंडर हर रोज़
इनसे ही 
मेरे अल्फ़ाज़ की 
इमारतें 
बनती हैं बिखर जाती हैं
मुझको पाना है
तो खुद को 
तुम्हें खोना होगा
मैं तो बस रेत हूँ
रेत सा तुमको 
होना होगा.

33 टिप्‍पणियां:

  1. मुझको पाना है
    तो खुद को
    तुम्हें खोना होगा
    मैं तो बस रेत हूँ
    रेत सा तुमको
    होना होगा.


    रेत सा तुमको होना होगा....कितना खूबसूरत अंदाज है ....वाकई विशाल जी, दिल की कलम से ही लिखते हैं आप. हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  2. वर्षा जी,
    बहुत शुक्रिया.
    आपकी स्नेहयुक्त आशीष के लिए.

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  3. प्रभावशाली प्रस्तुति ||

    बहुत-बहुत बधाई ||

    शुभ विजया ||

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  4. दिनेश भाई,
    शुक्रिया ,
    आप भी तो एक हैं.
    आप अकेले सौ के बराबर हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  5. क्या बात है ....
    बहुत अंतर आया है आपकी लेखनी में ....
    नीचे क्षणिकाएं भी गज़ब की हैं ....
    तो भेजिए न सरस्वती-सुमन के लिए ...

    अपनी १०,१२ क्षणिकाएं , संक्षिप्त परिचय और तस्वीर ,,,,:))

    उत्तर देंहटाएं
  6. क्या बात है ....
    बहुत अंतर आया है आपकी लेखनी में ....
    नीचे क्षणिकाएं भी गज़ब की हैं ....
    तो भेजिए न सरस्वती-सुमन के लिए ...

    अपनी १०,१२ क्षणिकाएं , संक्षिप्त परिचय और तस्वीर ,,,,:))

    उत्तर देंहटाएं
  7. मेरा चेहरा तलाशने वाले
    तुझको
    इसकी नींव तक
    जाना होगा
    बड़ी ज़रखेज मिट्टी थी
    कभी वहां
    फसले गुल लहलहाती थी
    आज बस रेत है

    ओह! आज बस रेत है.
    क्या कहें अल्फाज ही नहीं कुछ कहने के लिए.

    विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  8. मुझको पाना है
    तो खुद को
    तुम्हें खोना होगा
    मैं तो बस रेत हूँ
    रेत सा तुमको
    होना होगा.

    बहुत सुन्दर!

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुन्दर कविता... आपके लेखन में निरंतर सुधार हो रहा है.

    उत्तर देंहटाएं
  10. मेरे अल्फ़ाज़ की
    इमारत में
    मेरा चेहरा तलाशने वाले
    तुझको
    इसकी नींव तक
    जाना होगा
    बड़ी ज़रखेज मिट्टी थी
    कभी वहां
    फसले गुल लहलहाती थी
    आज बस रेत है
    waah

    उत्तर देंहटाएं
  11. मेरे अल्फ़ाज़ की
    इमारतें
    बनती हैं बिखर जाती हैं
    मुझको पाना है
    तो खुद को
    तुम्हें खोना होगा

    दर्शन से परिपूर्ण अंदाज और जीवन की वास्तविकता .....!

    उत्तर देंहटाएं
  12. मेरे अल्फ़ाज़ की
    इमारतें
    बनती हैं बिखर जाती हैं
    मुझको पाना है
    तो खुद को
    तुम्हें खोना होगा

    दर्शन से परिपूर्ण अंदाज और जीवन की वास्तविकता .....!

    उत्तर देंहटाएं
  13. ख़ूबसूरत...हमेशा की तरह...

    उत्तर देंहटाएं
  14. मैं तो बस रेत हूँ
    रेत सा तुमको
    होना होगा.

    बहुत ही खूबसूरत रचना... हमेशा की तरह बेमिसाल...

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं
  16. अगर मैं कुछ न कहूँ तो...रेत बना जा सकता है..

    उत्तर देंहटाएं
  17. मेरे अल्फ़ाज़ की
    इमारत में
    मेरा चेहरा तलाशने वाले
    तुझको
    इसकी नींव तक
    जाना होगा.

    बहुत सुंदर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  18. "मेरे अल्फ़ाज़ की
    इमारत में
    मेरा चेहरा तलाशने वाले
    तुझको
    इसकी नींव तक
    जाना होगा"


    अक्सर अंजाम देखने वाले आगाज़ नहीं देखते और
    आगाज़ देखने वाले अंजाम के लिए हौसला नहीं रख पाते....!!

    सुन्दर रचना..!!

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  19. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  20. फैसला करने का हक , शायद नहीं मुझको
    है हौसला जरूर आफ़ताब बनने का.
    थोड़ी रौशनी बिखेरूंगा सबके लिए,
    पर चलूँगा साथ मैं भी तेरे, अपने पाँव थकने तक..

    आपकी टिप्पणी का सन्देश पढ़कर मेरे मन में उपरोक्त विचार आये.

    बहुत सुन्दर रचना लिखी आपने, 'गुम' भी अच्छी लगी.

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  21. वाह ...बहुत खूब कहा है आपने
    बधाई उत्कृष्ट रचना के लिए........

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  22. आज आपकी पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली (१२) के मंच पर प्रस्तुत की गई है /कृपया आइये और अपने विचारों से हमें अवगत करिए /आप इसी तरह मेहनत और लगन से हिंदी की सेवा करते रहें यही कमना है /आपका ब्लोगर्स मीट वीकली के मंच पर आपका स्वागत है /जरुर पधारें /

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  23. मुझको पाना है
    तो खुद को
    तुम्हें खोना होगा
    मैं तो बस रेत हूँ
    रेत सा तुमको
    होना होगा.
    बहुत सुंदर क्या बात है.....

    उत्तर देंहटाएं
  24. अति सुंदर प्रस्तुति !
    बिम्ब रचना तो कमाल की है !
    बधाई !

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  25. behtarin...kavi ki manovyatha aaur yatharth ke dahartal se jude hone ke behtarin sanket..dher sari badhayee aaur punah amantran ke sat

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  26. मैं तो बस रेत हूँ
    रेत सा तुमको
    होना होगा.
    kya baat hai......

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  27. मैं तो बस रेत हूँ
    रेत सा तुमको
    होना होगा.

    सुन्दर!
    बिना एकात्मता के पहचान कहाँ संभव है!

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  28. प्रभावशाली प्रस्तुति
    आपको और आपके प्रियजनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें….!

    संजय भास्कर
    आदत....मुस्कुराने की
    नई पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं

मंजिल न दे ,चिराग न दे , हौसला तो दे.
तिनके का ही सही, मगर आसरा तो दे.
मैंने ये कब कहा कि मेरे हक में हो जबाब
लेकिन खामोश क्यों है कोई फैसला तो दे.