21 सितंबर 2011

गुटरगूं

दोस्तों का झूठा सच्चा प्यार देख देख कर
कर रहा हूँ अब मैं ,ऐतबार देख देख कर,

मैं हूँ उसकी ज़िन्दगी,वो है मेरी ज़िन्दगी,
बीमा एजेंट कर रहा इसरार देख देख कर,

वो भी क्या वक़्त था, किया करता था गुटरगूं,
भुन चुका वो कबूतर तेरी तकरार देख देख कर, 

करता हूँ रोज़  याद ,आती नहीं  है छींक, 
हर कंपनी की सूंघ ली,नसवार देख देख कर,

कोई लगती नहीं दवा,मरीज़े इश्क है कैसा,
डॉक्टर खुद हो गया,बीमार देख देख कर,

आज की रात पीठ करके,सोऊँगा चैन से,
तंग आ गया हूँ रोज़ का इनकार देख देख कर,

लो छप गयी है आज,  ख़बर मेरी मौत की,
रो रहा हूँ हाथ का ,अखबार देख देख कर.

21 टिप्‍पणियां:

  1. लो छप गयी है आज, ख़बर मेरी मौत की,
    रो रहा हूँ हाथ का ,अखबार देख देख कर.

    बहुत खूब ,लाजबाब

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  2. लो छप गयी है आज, ख़बर मेरी मौत की,
    रो रहा हूँ हाथ का ,अखबार देख देख कर.

    अच्छे शेर ..वाह.

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  3. दोस्तों का झूठा सच्चा प्यार देख देख कर
    कर रहा हूँ अब मैं ,ऐतबार देख देख कर,

    देख देख कर ऐतबार कीजियेगा
    झूठा हो तो भी प्यार कीजियेगा
    प्यार के आगे झूठ की क्या बिसात
    आपका सच्चा प्यार देगा हर झूंठ को मात.

    विशाल भाई,झूंठे सच्चे जैसे भी हैं आपके हैं.
    आपके प्यार का इंतजार करते रहते हैं.
    ऐतबार के काबिल हों, बस यही दुआ करते हैं.

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  4. भुन चूका है वो कबूतर ,पीठ करके सोना ..क्या खूब लिखा है विशाल जी . मुस्कराहट रुक नहीं रही है..मेरी

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  5. आज की रात पीठ करके,सोऊँगा चैन से,
    तंग आ गया हूँ रोज़ का इनकार देख देख कर,

    बहुत खूब...
    सुन्दर भावाभिव्यक्ति....

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  6. कुछ अलग सा लगा......नए के लिए शुभकामनाये|

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  7. वाह विशाल जी .. ये हास्य भरे शेर भी कमाल के हैं ... मुस्कान ला देते हैं ...

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  8. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है.
    कृपया पधारें
    चर्चामंच-645,चर्चाकार- दिलबाग विर्क

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  9. दुखभरी ग़ज़ल ही सही , लेकिन ज़बर्ज़स्त लिखी है ।

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  10. वाह विशाल जी ..हर शेर कमाल का हैं ...अलग और अनूठा सा अंदाज़....

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  11. ये हास्य भरे शेर भी कमाल के हैं| गज़ब के भाव्।

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  12. करता हूँ रोज़ याद ,आती नहीं है छींक,
    हर कंपनी की सूंघ ली,नसवार देख देख कर,

    अच्छा लगा यह नसवार का सूंघना भी ..लेकिन डुप्लीकेट होगी तो कहाँ छींक आएगी ....दुबारा कोशिश कीजिये अच्छी सी कम्पनी की ले लीजिये ...!

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मंजिल न दे ,चिराग न दे , हौसला तो दे.
तिनके का ही सही, मगर आसरा तो दे.
मैंने ये कब कहा कि मेरे हक में हो जबाब
लेकिन खामोश क्यों है कोई फैसला तो दे.